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आज सुबह से एक मामला सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, इसमें कहा जा रहा है की कुवैत की शक्तिशाली पार्लियामेंट में मांग की गयी है की देश में आरएसएस-बीजेपी से जुड़े किसी भी व्यक्ति को कुवैत में प्रवेश ना दिया जाएँ तथा जो लोग यहाँ काम कर रहें हैं उन्हें  ढूंढकर देश से निकाला जाए. 

जब यह खबर हमारे सामने आई तो हमने भी इसकी सच्चाई परखने की कोशिश की लेकिन तब तक कुवैत की किसी भी न्यूज़ मीडिया ने इसे कवर नहीं किया था लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे यह स्क्रीनशॉट (जिसमे एक ट्वीट के साथ एक फोटो लगा है और उसमे अरबी में कुछ लिखा हुआ है”) काफी बार सामने आने लगा. हर बार यही दावा किया जा रहा था की कुवैत कीपार्लियामेंट में मांग की गयी है की ऐसे लोगो पर रोक लगाये.

थोड़ी ही देर बाद ट्विटर पर कुवैत ट्रेंड्ज़ करने लगा, क्लिक करके देखा तो पता चला शशि थरूर ने भी उस ट्वीट को retweet कर दिया है. हालाँकि वो ट्वीट (नीचे देखें ) किसी भी वेरीफाईड अकाउंट से नहीं किया गया था बस उस ट्विटर हैंडल के follower काफी बड़ी संख्या में हैं तथा यही ट्वीट बार बार शेयर किया जा रहा है.


इसके बाद हमने इन्टरनेट खंगालना शुरू किया तो सबसे पहले कुवैती न्यूज़पेपर को एक एक करके सर्च कर डाला, Kuwait Times, Arab times, अल सबाह, अल वतन, अल राइ, अल जरीदा जैसे दर्जनों न्यूज़ पेपर पढ़ डाले और उनके सर्च बार में जाकर BJP, rss, तथा parliament जैसे कीवर्ड्स डालकर सर्च कर लिया लेकिन ऐसी कोई न्यूज़ सामने नहीं आई जिसमे की यह मांग की गयी हो की कुवैती पार्लियामेंट में बीजेपी-आरएसएस के सदस्यों पर प्रतिबन्ध लगाया गया हो. अगर कोई ऐसी खबर होती तो कुवैत सहित विश्व के दर्जनों न्यूज़ पेपर इस खबर को कवर करतें लेकिन हर बड़े न्यूज़ चैनल(अंतर्राष्ट्रीय) पर यह खबर नहीं थी.

वहीँ इस बात पुष्ठी स्वम कुवैत में भारतीय राजदूत ने कर दी, ऑफिसियल हैंडल से ट्वीट करते हुए भारतीय एम्बेसी ने कहा की

भारतीय संसद के एक माननीय सदस्य को एक पाकिस्तानी एजेंट के भारत-विरोधी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए देखकर दुख होता है, जिसे उसकी भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ‘शांति का राजदूत’ पुरस्कार मिला था। हमें ऐसे भारत विरोधी तत्वों को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।

Fact Check – अभी तक ऐसी कोई न्यूज़ सामने नहीं आई है जिसमे यह बताया गया हो की कुवैती पार्लियामेंट मे आरएसएस-बीजेपी के सदस्यों पर तुरंत प्रतिबन्ध लगाने की मांग की गयी हो तथा देश में ऐसे कर्मचारियों को ढूंढकर उन्हें देश से निकालने की बात की गयी हो. जिस ट्विटर अकाउंट से यह ट्वीट किया गया है वो विश्वसनीय नहीं है.