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कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक बहुत ही इन्स्पिरिंग पोस्ट आई. Ranjith R Panathur नामक शख़्स ने मलयालम में एक पोस्ट डाला और ये कहानी वायरल हो गई और हर तरफ छा गयी. इस पोस्ट में एक मिट्टी का घर था, छोटा सा, टूटा-फूटा सा. घर पर छत के नाम पर काले रंग का तिरपाल लगा था.

The poor guy Ranjith R Panathur became IIM professor

अब आप सोच रहे है होंगे तो इससे क्या मतलब दरअसल ये घर है IIM रांची में पढ़ाने के लिये नियुक्त किये गये रंजीत रामाचंद्रन का. इस घर में रंजीत के माता-पिता, 2 छोटे भाई-बहन रहते थे और रंजीत के पिता दर्ज़ी हैं और मां मनरेगा मज़दूर. रंजीत को पढ़ाने के लिये उन्होंने आकाश-पाताल एक कर दिया. ये परिवर केरल के कासारगोड से है.

The poor guy Ranjith R Panathur became IIM professor

दरअसल रणजीत को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था रंजीत ने पोस्ट ग्रैजुएशन सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी, कासारगोड से किया और BSNL एक्सचेंज को रंजीत ने स्टडी रूम और अपने रहने का कमरा बना लिया था. पोस्ट ग्रैजुएशन के बाद रंजीत को IIT-Madras से Phd करने का मौका मिला.

The poor guy Ranjith R Panathur became IIM professor

IIT Madras में ऐंट्री के समय रंजीत को सिर्फ़ मलायलम आती थी और अंग्रेज़ी में बात-चीत करना भी नहीं आता था. वो कासरगोड से बाहर गया था.

The poor guy Ranjith R Panathur became IIM professor

IIT Madras के प्रोफ़ेसर डॉ. सुभाष शशिधरण और प्रोफ़ेसर वैदेही ने रंजीत की मदद की और रंजीत ने Indian Express के साथ बात-चीत में बताया कि प्रोफ़ेसर सुभाष ने उसे गाइड किया और कोर्स न छोड़ने के लिये प्रेरित किया. अगस्त 2020 रंजीत को इकोनॉमिक्स में Phd मिली और वो डॉ. रंजीत बन गये.

The poor guy Ranjith R Panathur became IIM professor

IIT Madras में रंजीत ने न सिर्फ़ स्टाइपेन्ड पर गुज़ारा किया, बल्कि उसमें से कुछ बचत करके घर भी भेजना शुरू किया. Mathrubhumi के अनुसार, रंजीत ने जापान और जर्मनी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ़्रेंस में भी पेपर प्रेज़ेंट किये हैं.